Help To people in Covid-19

Help To people in Covid-19

 

 

हाल ही में कोविड-19 के दौरान कई गांव और छोटे कस्बों में दाने-दाने के लिए लोग मोहताज हो गए थे। प्रवासी मजदूरो के घर वापसी के कारण वह पूरी तरह से बेरोजगार हो गए थे, ना उनके पास कारोबार का कोई जरिया था और ना ही उनके परिवार का पालन पोषण करने के लिए कोई बचत थी। ऐसे में उनके घरों में अनाजों की कमी होने लगी। लॉकडाउन का असर गरीब और बेसहारा मजदूरों पर काफी भयानक पड़ा था। ऐसे में हमारा एनजीओ ‘अखिल आदिवासी चेतना मंच’ ने उन कस्बों और  गांव में जाकर उन गांव वासियों की मदद की। हमने वहां अनाज वितरण करवाएं ताकि  गांव के निवासी  भूखे ना रह सके।

 

हमने वहां के लोगों को सैनिटाइजर वा मास्क बटवाएं ताकि वहां के लोग कोविड-19 से सुरक्षित रह सके। ‘अखिल आदिवासी चेतना मंच’ ने उन गांवों और कस्बों में जागरूकता अभियान भी चलाया। ताकि वहां गरीब और अनपढ़ लोगों को कोरोनावायरस से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान करे। उन्हें कोरोनावायरस से बचाव के तरीकों से अवगत कराया, ताकि वहां के लोग नियमों को सुसज्जित रूप से पालन करते हुए कोरोनावायरस जैसी जानलेवा बीमारी से सुरक्षित रह सके। वहां छोटे-छोटे मासूम बच्चों को हमने बिस्कुट व मिठाइयां दी, ताकि उन मासूम बच्चों के चेहरों पर खुशियां आ सके। हमारा उद्देश हमारा लक्ष्य  केवल एक है, जरूरतमंद और गरीब परिवारों की मदद करना। जिनके बच्चे अनपढ़ रह जाते हैं, जिनके घर में एक वक्त का चूल्हा नहीं जल पाता, उन्हें हम कुछ सुविधाएं प्रदान कर सकें, ताकि उनके बच्चे पढ़ लिख कर एक अच्छा इंसान बन सके। ताकि उन परिवारों को तीन वक्त का खाना नसीब हो सके।

 

कोरोनावायरस महामारी के कारण ऐसे छोटे गांव और कस्बों में हाहाकार मच चुका था। यदि उस समय ‘अखिल आदिवासी चेतना मंच’ ना होता तो गांव और कस्बों को काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ सकता था। हमारे द्वारा दी गई अनाज, सब्जियां तथा दालें इत्यादि की मदद से उनके घर में चूल्हा जलते रहा। हमारा महत्वपूर्ण लक्ष्य ज़रूरतमंदों को आर्थिक रूप से मजबूत करना है, उनकी जिंदगी को सुसज्जित रूप से चलाना है।

 

‘अखिल आदिवासी चेतना मंच’ ने कस्बों और गांव में जाकर सैनिटाइजर बटवाए तथा उनके फायदे से अवगत कराया, की  किस तरह उन्हें सैनिटाइजर का इस्तेमाल करना है। इस बारे में संपूर्ण जानकारी प्रदान की तथा इसके अलावा हैंड वॉश का इस्तेमाल करने के तरीको से भी उन्हें अवगत कराया गया।  गांव के निवासियों को रोजाना मास्क पहनने के बारे में बताया गया। उनसे कहा गया कि किस तरह मास्क पहनकर कोरोनावायरस से बचा जा सकता है। हमने वहां के लोगों को सलाह देते हुए कहा कि घर से निकलते वक्त मास्क जरूर पहना करें और बुजुर्गों एवं 10 साल से छोटे बच्चों को इस बात की नसीहत दी, कि वह बिना जरूरत घर से बाहर ना निकले। आदिवासी चेतना मंच तमाम जरूरतमंदों के लिए हर समय तत्पर खड़ा रहता है।

 

आदिवासी चेतना मंच  बुजुर्गों  और अनाथ बच्चों के लिए हर तरह की सुख सुविधाएं प्रदान करता है  ताकि उन बेसहारा लोगों को  किसी भी चीज की कमी ना हो सके  महिलाओं को  कई तरह के  लघु उद्योगों का प्रशिक्षण देना हमारा कार्य है  ताकि वह छोटे-मोटे कार्य कर अपने परिवार का पालन पोषण कर सके शिक्षित युवा एवं युवतियों को  कई तकनीकी  ज्ञान देना हमारा कर्तव्य है  ताकि उन्हें जल्द से जल्द नौकरी प्राप्त हो सके। हमारा काम उनकी परेशानियों को दूर करना और उनके चेहरों पर मुस्कान लाना है। आदिवासी चेतना मंच ने घर पर मास्क बनाने का प्रशिक्षण भी गांव वासियों को दिया, ताकि वह कम खर्च में मास्क बनाकर उसका इस्तेमाल कर सकें। आदिवासी समुदाय इतना पिछड़ा नहीं है, जितना लोग उन्हें कर दिए हैं। हम अक्सर पिछड़े अनुसूचित जाति-जनजाति को प्रोत्साहन देते हैं, दुनिया में आगे बढ़ने तथा कदम से कदम मिलाकर चलने का। हम आदिवासी किसी से कम नहीं हम प्रकृति के देन और प्रकृति के रखवाले हैं। जहां कहीं कोई तकलीफ में होगा या जरूरतमंड होगा। आदिवासी चेतना मंच उस तकलीफ को दूर करने के लिए जरूर पहुंचेगा। लोगों के दुखों को दूर कर उन्हें खुशियां देना ‘अखिल आदिवासी चेतना मंच का कर्तव्य’ और कार्य है।

Leave a Reply