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अखिल आदिवासी चेतना मंच

शोभा सोरेन एक बेहतरीन भारतीय राजनीतिज्ञ है। शोभा बिहार में आदिवासी जाति की सर्वप्रथम आदिवासी महिला लोकसभा प्रत्याशी है, जो अखिल आदिवासी चेतना मंच के सचिव और सामाजिक कार्यकर्ता भी है। यह काफी लंबे समय से ‘अखिल आदिवासी चेतना मंच’ से जुड़ी हुई है, जो भारतीय समाज के सबसे कमजोर वर्गो, अनुसूचित जाति-जनजाति, पिछड़ा वर्ग तथा अन्य धार्मिक और अल्पसंख्यकों के जीवन में सुधार लाने के लिए तथा समाज में परिवर्तन करने के उद्देश्य से इस मंच से जुड़ कर कई लोगों का उद्धार भी किया है।

व्यक्तिगत जीवन

यदि बात करें शोभा सोरेन के व्यक्तिगत जीवन के बारे में तो बता दूं, कि शोभा सोरेन का जन्म 1 जनवरी 1991 में उत्तरी मंदिर बुद्धा कॉलोनी पटना में हुआ था। इनके पिता का नाम काशीनाथ जो पुलिसकर्मी पटना में कार्यत थे। शोभा सोरेन के तीन बहन और एक भाई है, इन्हें पूरे पटना में एमपी मैडम के नाम से जाना जाता है। शोभा सोरेन ने साल 2018 में जय प्रकाश यूनिवर्सिटी विश्वविद्यालय के अंतर्गत राजेंद्र कॉलेज छपरा से कला में स्नातक की पढ़ाई की, जिसके बाद इन्होंने अपना कदम राजनीति की ओर ले लिया। ताकि आदिवासियों और पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए भाषा, संस्कृति, आदिवासी पारंपरिक हथियार जैसे तीर धनुष इत्यादि को समाज के बीच लाने में मदद कर सके और इन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और संघर्ष के साथ यह करके भी दिखाया।

राजनीतिक जीवन

शोभा सोरेन की यदि राजनीतिक जीवन के बाते में बात करें, तो उनका जीवन काफी शानदार रहा है। शोभा साल 2019 में सबसे पहली आदिवासी महिला लोकसभा प्रत्याशी निर्दलीय पार्टी से खड़ी हुई थी, लेकिन कुछ वोट से पीछे रह गए। लेकिन फिर भी उनका कर्तव्य जनता के लिए बिल्कुल भी कम नहीं हुआ। बता दूं, कि शोभा सोरेन को बिहार के लोग एमपी मैडम कह कर पुकारते है। शोभा राजनीति में रहते हुए प्रत्येक समय जनता की सेवा में लगी रहती है, जरूरतमंदों की मदद करना और उनके लिए कुछ अच्छा करने में हमेशा तत्पर रह्ती है।

लक्ष्य

शोभा सोरेन का उपनाम अंजलि है। न्याय स्वतंत्रता और समानता तथा भाईचारे के सर्वोच्च सिद्धांतों वाला सोच, भारत को जाति रहित मंच प्रदान करता है। भारत देश एक ऐसा देश है, जहां हर जाति हर धर्म को समान अधिकार प्राप्त है। शोभा सोरेन उर्फ के एम के शोभा कुमारी आदिवासी समाज तथा अनुसूचित जाति-जनजाति के लिए कुछ अच्छा करने की सोच ही ‘अखिल आदिवासी चेतना मंच’ से जोड़ रखा है  जिसके जरिए वह जरूरतमंदों बुजुर्गों अनाथो सहित तमाम लोगों की सेवा करने का अवसर मिलता है।

 

 इस गठन का मुख्य उद्देश्य क्रांतिकारी, सामाजिक और आर्थिक आंदोलन के रूप में काम करने के लिए किया गया है जो भारत को धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक समाजवादी गणराज्य बनाने के लिए किया गया है। समस्त नागरिकों को सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विश्वास, धर्म और विचार की स्वतंत्रता तथा प्रतिष्ठा दिलाने में मदद करता है। यह व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए भी मदद करता है। खासकर इसका गठन भारतीय जाति व्यवस्था के अंतर्गत सबसे नीचे तबके के लोग यानी कि पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति, तथा  अल्पसंख्यक लोग शामिल हैं,  जिन्हें समाज में अपनी जगह दिलाने में यह  मदद करता है।

 

इस गठन का मुख्य कार्य लोगों को अपने पैरों पर खड़े होना सिखाना है। उसे आत्मनिर्भर बनना तथा खुद पर भरोसा कर जीवन जीने की प्रेरणा देना है। उसे नहीं तकनीको इत्यादि का प्रशिक्षण देना है, ताकि इसके मदद से वह समाज में नौकरी प्राप्त कर सकें। पिछड़े अनुसूचित जाति-जनजाति में शामिल बच्चों की शिक्षा कुशल करना है ताकि यही बच्चे पढ़कर समाज में बाकी की तुलना बराबरी कर सकें। अपना भविष्य सवांर सके और बड़ा बनकर दिखाएं।  इस गठन का मुख्य कार्य बुजुर्गों को रहने के लिए छत तथा खाने के लिए भोजन मुहैया कराना है ताकि उन्हें दर-दर भटकना ना पड़े। इन कार्यों में शोभा सोरेन बढ़ चढ़कर भाग लेती हैं तथा एक कुशल राजनीतिज्ञ और सार्वजनिक कार्यों को भली-भांति निभाती भी हैं। इन कार्यों को पूरा करने के लिए ‘अखिल आदिवासी चेतना मंच’ के साथ शोभा सोरेन लगातार जुड़ी रहती है और इन कार्यों में सहायता करती है।

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